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Wednesday, September 23, 2015

क्या आपकी कुंडली में लक्ष्मी योग है?

क्या आपकी कुंडली में लक्ष्मी योग है?

क्या आपकी कुंडली में लक्ष्मी योग है? - Do you have Laxmi Yoga in your kundali
ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि में धन वैभव और सुख के लिए कुण्डली में मौजूद धनदायक योग या लक्ष्मी योग काफी महत्वपूर्ण होते हैं. जन्म कुण्डली एवं चंद्र कुंडली में विशेष धन योग तब बनते हैं जब जन्म व चंद्र कुंडली में यदि द्वितीय भाव का स्वामी एकादश भाव में और एकादशेश दूसरे भाव में स्थित हो अथवा द्वितीयेश एवं एकादशेश एक साथ व नवमेश द्वारा दृष्ट हो तो व्यक्ति धनवान होता है.

ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि में धन वैभव और सुख के लिए कुण्डली में मौजूद धनदायक योग या लक्ष्मी योग काफी महत्वपूर्ण होते हैं. जन्म कुण्डली एवं चंद्र कुंडली में विशेष धन योग तब बनते हैं जब जन्म व चंद्र कुंडली में यदि द्वितीय भाव का स्वामी एकादश भाव में और एकादशेश दूसरे भाव में स्थित हो अथवा द्वितीयेश एवं एकादशेश एक साथ व नवमेश द्वारा दृष्ट हो तो व्यक्ति धनवान होता है.
शुक्र की द्वितीय भाव में स्थिति को धन लाभ के लिए बहुत महत्व दिया गया है, यदि शुक्र द्वितीय भाव में हो और गुरु सातवें भाव, चतुर्थेश चौथे भाव में स्थित हो तो व्यक्ति राजा के समान जीवन जीने वाला होता है. ऐसे योग में साधारण परिवार में जन्म लेकर भी जातक अत्यधिक संपति का मालिक बनता है.  सामान्य व्यक्ति भी इन योगों के रहते उच्च स्थिति प्राप्त कर सकता है.

मेष लग्न के लिए धन योग (Mesh alagna dhana yoga)
लग्नेश मंगल कर्मेश शनि और भाग्येश गुरु पंचम भाव में होतो धन योग बनता है.
इसी प्रकार यदि सूर्य पंचम भाव में हो और गुरु चंद्र एकादश भाव में हों तो भी धन योग बनता है और जातक अच्छी धन संपत्ति पाता है.

वृष लग्न के लिए धन योग (Vrisha lagna dhana yoga)
मिथुन में शुक्र, मीन में बुध तथा गुरु केन्द्र में हो तो अचानक धन लाभ मिलता है. इसी प्रकार यदि शनि और बुध दोनों दूसरे भाव में मिथुन राशि में हों तो खूब सारी धन संपदा प्राप्त होती है.

मिथुन लग्न के लिए धन योग ( Mithuna lagna dhana yoga)
नवम भाव में बुध और शनि की युति अच्छा धन योग बनाती है. यदि चंद्रमा उच्च का हो तो पैतृक संपत्ति से धन लाभ प्राप्त होता है.

कर्क लग्न के लिए धन योग (Karka lagna dhana yoga)
यदि कुण्डली में शुक्र दूसरे और बारहवें भाव में हो तो जातक धनवान बनता है. अगर गुरू शत्रु भाव में स्थित हो और केतु के साथ युति में हो तो जातक भरपूर धन और ऎश्वर्य प्राप्त करता है.

सिंह लग्न के लिए धन योग (Simha lagna dhana yoga)
शुक्र चंद्रमा के साथ नवांश कुण्डली में बली अवस्था में हो तो व्यक्ति व्यापार एवं व्यवसाय द्वारा खूब धन कमाता है. यदि शुक्र बली होकर मंगल के साथ चौथे भाव में स्थित हो तो जातक को धन लाभ का सुख प्राप्त होता है.

कन्या लग्न के लिए धन योग (Kanya lagna dhana yoga)
शुक्र और केतु दूसरे भाव में हों तो अचानक धन लाभ के योग बनते हैं. यदि कुण्डली में चंद्रमा कर्म भाव में हो तथा बुध लग्न में हो व शुक्र दूसरे भाव स्थित हो तो जातक अच्छी संपत्ति संपन्न बनता है.

तुला लग्न के लिए धन योग (Tula lagna dhana yoga)
कुण्डली में दूसरे भाव में शुक्र और केतु हों तो जातक को खूब धन संपत्ति प्राप्त होती है. अगर मंगल, शुक्र, शनि और राहु बारहवें भाव में होंतो व्यक्ति को अतुल्य धन मिलता है.

वृश्चिक लग्न के लिए धन योग (Vrishchika lagna dhana yoga)
कुण्डली में बुध और गुरू पांचवें भाव में स्थित हो तथा चंद्रमा एकादश भाव में हो तो व्यक्ति करोड़पति बनता है.
यदि चंद्रमा, गुरू और केतु दसवें स्थान में होंतो जातक धनवान व भाग्यवान बनता है.

धनु लग्न के लिए धन योग (Dhanu lagna dhana yoga)
कुण्डली में चंद्रमा आठवें भाव में स्थित हो और सूर्य, शुक्र तथा शनि कर्क राशि में स्थित हों तो जातक को बहुत सारी संपत्ति प्राप्त होती है. यदि गुरू बुध लग्न मेषों तथा सूर्य व शुक्र दुसरे भाव में तथा मंगल और राहु छठे भाव मे हों तो अच्छा धन लाभ प्राप्त होता है.

मकर लग्न के लिए धन योग (Makar lagna dhana yoga)
जातक की कुण्डली में चंद्रमा और मंगल एक साथ केन्द्र के भावों में हो या त्रिकोण भाव में स्थित हों तो जातक धनी बनता है. धनेश तुला राशि में और मंगल उच्च का स्थित हो व्यक्ति करोड़पति बनता है.

कुंभ लग्न के लिए धन योग (Kumbha lagna dhana yoga)
कर्म भाव अर्थात दसवें भाव में चंद्र और शनि की युति व्यक्ति को धनवान बनाती है. यदि शनि लग्न में हो और मंगल छठे भाव में हो तो जातक ऎश्वर्य से युक्त होता है.

मीन लग्न के लिए धन योग (Meena lagna dhana yoga)
कुण्डली के दूसरे भाव में चंद्रमा और पांचवें भाव में मंगल हो तो अच्छे धन लाभ का योग होता है. यदि गुरु छठे भाव में शुक्र आठवें भाव में शनि बारहवें भाव और चंद्रमा एकादशेश हो तो जातक कुबेर के समान धन पाता है.

कुछ अन्य धन योग (More dhana yogas)
यह तो बात हुई लग्न द्वारा धन लाभ के योगों की अब हम कुछ अन्य धन योगों के विषय में चर्चा करेंगे जो इस प्रकार बनते हैं.
मेष या कर्क राशि में स्थित बुध व्यक्ति को धनवान बनाता है, जब गुरु नवे और ग्यारहवें और सूर्य पांचवे भाव में बैठा हो तब व्यक्ति धनवान होता है.
जब चंद्रमा और गुरु या चंद्रमा और शुक्र पांचवे भाव में बैठ जाए तो व्यक्ति को अमीर बनाता है.
सूर्य का छठे और ग्यारहवें भाव में होना व्यक्ति को अपार धन दिलाता है.
यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में शनि या मंगल या राहू बैठा हो तो व्यक्ति धनवान बनता है.  
मंगल चौथे भाव, सूर्य पांचवे भाव में और गुरु ग्यारहवे या पांचवे भाव में होने पर व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से लाभ मिलता है

Thursday, March 12, 2015

अशुभता को कम करने के लिय उपाय



दोस्तो

आपकी कुंडली मे अनेको योग जन्म समय से होते है जो आपका जीवन चक्र निर्धारित करते है। इन योगो मे समय समय पर गोचर से बदलाव होता रहता है। जिससे अच्छे बुरे परिणाम की मात्रा कम या जयादा हो जाती है। ओर कुछ अस्थाई या तात्कालिक योग बनते है जो योग बनने के समय परनाम देते है शुभ या अशुभ।

अशुभता को कम करने के लिय उपाय किये जाते है।
अत मे याह कुछ योग दे रहा हू।
अगर ये योग स्थाई है तो उपाय भी जीवन मे कई बार भी करना पड़ सकता है। अगर अस्थाई है तो उसी समय।


Saturn –Sun- Moon Shree Chandra Keshri Japa Hpme



Saturn –Sun- Mars Meenakhi, Muneswar Swami, Subhramaniswar, NAVGRAH HOMA

Saturn –Sun- Jupiter Shree Brunneswari, Rameshwaram. Kanyakumari, Vinayak, Navgrah

Saturn –Sun- Venus Mahabaleswar,Ganga Home, Shive Temple

Saturn –Sun- Dh Shiva Kashi & Shiva Abhishekha

Saturn –Sun- Dt Satnarayan Pooja, Ganesh pooja.

ये योग अगर सभी ग्रह एक राशि मे हो या एक दूसरे से त्रिकोण मे हो। या एक एक राशि मे दूसरा उससे दूसरे भाव मे ओर तीसरा उससे तीसरे भाव मे हो। तो बनेगे। योग की ताकत ग्रह के बैठने ,राशी, भाव,भावेश दृस्टि आदि आदि के अनुसार होगी।
अस्थाई योग अगर गोचर ओर native ग्रह के आपसी संबंध से बनेगा।अर्थात तात्कालिक ओर native ग्रह मे कोई 3 ग्रह इस प्रकार स्थित होंगे तो योग बन जायेगा।

कोई शक हो तो पूछ ले।
नोट - अगर उपरोक्त ग्रह लिखे हुए हिसाब से डिग्री वाइज भी इसी प्रकार हो तो योग बहुत स्ट्रोंग होगा। जेसे
पहले योग मे
शनि सूर्य चन्द्र है।
अगर शनि कम डिग्री का सूर्य उससे जयदा ओर चन्द्र सबसे ज्यादा हो
तो पूर्ण एवम् ताकत वर योग होगा

टिप no 5

सूर्य शेर बुध विष्णु राहु मुह अत शेर मुखी विष्णु। अत नरसिघ भगवान । अत शेर के तरह एक्टिव एवम् दहाड़ने वाला
शेर बोलता नही बोलने मे परेसानी आदि आदि इसी तरह राशि दृष्टि आदि आदि देख कर निकालो जवाब देंना। इसमे नरसिघ पूजा पाठ या पुराण पाठ या पठन उपाय है।
ऊपर के उपाय इसी आधार पर है। ओर ancient बुक्स से है।