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Friday, March 13, 2015

अपने आराध्य देवता कुल देवता तथा इष्ट देवता को हम कैसे जान सकते है

 आराध्य देवता कुल देवता तथा इष्ट देवता को हम कैसे जान सकते है



  आराध्य देवता कुल देवता तथा इष्ट देवता को हम कैसे जान सकते है

 

अपने आराध्य देवता कुल देवता तथा इष्ट देवता को हम कैसे जान सकते है ? कैसे करे हम अपने आराध्य की उपासना ? तथा जानिये किस आराध्य देवता की पूजा कर के हम अपने जीवन को खुशहाल एवं प्रगति के पथ पर ले जा सकते है?...

“आप को अपने भीतर से ही खुद का एवं अपने आराध्य का विकास करना होता है। कोई भी ज्ञान आप को बिना आराध्यदेव की कृपा से आपको कुछ सीखा नहीं सकता, कोई भी शक्ति आपको बिना अपने आराध्य देव के कृपा बिना आध्यात्मिक एवं धनवान नहीं बना सकती। आपको सिखाने वाली और प्रगति की राह पर ले जाने वाली शक्ति और कोई नहीं, सिर्फ आपकी आत्मा एवं उस आत्मा मे बसने वाले हमारे आराध्य(इश्ट) देव ही है।"

नीचे सभी राशियों के आराध्य देवता दिए जा रहे हैं।
अपनी राशि के अनुसार अपने देवता की आराधना कर अपने जीवन को सुखी बनायेl

मेष : हनुमान जी
वृषभ : दुर्गा माँ
मिथुन : गणपति जी
कर्क: शिव जी
सिंह : विष्णु जी (श्रीराम )
कन्या : गणेश जी
तुला : देवी माँ
वृश्चिक : हनुमान जी
धनु : विष्णु जी
मकर : शिव जी
कुम्भ : शिव का रूद्र रूप
मीन : विष्णु जी (सत्यनारायण भगवान)

शास्त्रों की मान्यतानुसार अपने इष्ट देव की आराधना करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। आपके आराघ्य इष्ट देव कौन से होंगे इसे आप अपनी जन्म तारीख, जन्मदिन, बोलते नाम
की राशि या अपनी जन्म कुंडली की लग्न राशि के अनुसार जान सकते हैं।

जन्म माह : जिन्हें केवल जन्म का माह ज्ञात है, उनके लिए इष्ट देव
इस प्रकार होंगे-

-जिनका जन्म जनवरी या नवंबर माह में हुआ हो वे शिव या गणेश की पूजा करें।

-फरवरी में जन्मे शिव की उपासना करें।

-मार्च , अगस्त व दिसंबर में जन्मे व्यक्ति विष्णु की साधना करें।

-अप्रेल, सितंबर, अक्टूबर में जन्मे व्यक्ति गणेशजी की पूजा करें।

-मई व जून माह में जन्मे व्यक्ति मां भगवती की पूजा करें।

-जुलाई माह में जन्मे व्यक्ति विष्णु व गणेश का घ्यान करें।

जन्म वार से : जिनको वार का पता हो, परंतु समय का पता न हो, तो वार के
अनुसार इष्ट देव इस प्रकार होंगे-

रविवार- विष्णु।
सोमवार- शिवजी।
मंगलवार- हनुमानजी
बुधवार- गणेशजी।
गुरूवार- शिवजी
शुक्रवार- देवी।
शनिवार- भैरवजी।

जन्म कुंडली से : जिनको जन्म समय ज्ञात हो उनके लिए जन्म
कुंडली के पंचम स्थान से पूर्व जन्म के संचित कर्म, ज्ञान,
बुद्धि, शिक्षा, धर्म व इष्ट का बोध होता है। अरूण संहिता के अनुसार
व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर ग्रह या देवता भाव
विशेष में स्थित होकर अपना शुभाशुभ फल देते हैं।

राशि के आधार पर : पंचम स्थान में स्थित राशि के आधार पर आपके इष्ट देव
इस प्रकार होंगे-

मेष: सूर्य या विष्णुजी की आराधना करें।
वृष: गणेशजी।.
मिथुन: सरस्वती, तारा, लक्ष्मी।
कर्क: हनुमानजी।
सिंह: शिवजी।
कन्या: भैरव, हनुमानजी, काली।
तुला: भैरव, हनुमानजी, काली।
वृश्चिक: शिवजी।
धनु: हनुमानजी।
मकर: सरस्वती, तारा, लक्ष्मी।
कुंभ: गणेशजी।
मीन: दुर्गा, राधा, सीता या कोई देवी।

ग्रह के आधार पर इष्ट: पंचम स्थान में स्थित ग्रहों या ग्रह
की दृष्टि के आधार पर आपके इष्ट देव।

सूर्य: विष्णु।
चंद्रमा- राधा, पार्वती, शिव, दुर्गा।
मंगल- हनुमानजी, कार्तिकेय।
बुध- गणेश, विष्णु।
गुरू- शिव।
शुक्र- लक्ष्मी, तारा, सरस्वती।
शनि- भैरव, काली।

llजय श्री राम ll

Thursday, March 12, 2015

वनस्पति और जड़ों द्वारा उपाय

 वनस्पति और जड़ों द्वारा उपाय

ज्योतिष का एक क्षेत्र एेसा भी है जहाँ प्रत्येक वर्ग व्यक्ति के लिये समाधान है,वह है वनस्पति और जड़ों को धारण कर के अपने ग्रहयोगों को सुधारना. यह बहुत सस्ता,प्रभावशाली और सहज उपाय है जिसमें ग्रहों के अनुसार जड़ों और वनस्पतियों को विभक्त किया गया है. Þशारदा तिलकÞ और अन्य कई मध्य युगीन ग्रंथों में इस उपाय का उल्लेख मिलता है. एक निश्चित प्रक्रिया के अनुसार यदि अपनी राशि,नक्षत्र और कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुरूप जड़ों को धारण किया जाये तो विस्मयकारी तरीके से लाभ होता है आपकी कुंडली में जो ग्रह आपके लिये हितकारी और प्रगतिकारक हैं उनका किसी अच्छे ज्योतिष से निर्धारण करा कर उस के अनुरूप जड़ को शुद्ध कर के,उस ग्रह से सम्बंधित दिन मंत्रों का जाप कर के धारण करें और प्रतिदिन जाप करते रहें तो निश्चित लाभ होता है.

सूर्य

यदि आपकी कुंडली में सूर्य नीच का होकर तुला राशि में है और केंद्र में या लग्नस्थ है तो कृत्तिका नक्षत्र वाले दिन बेल का एक जड़ प्रात:काल तोडक़र,शिवालय में शिवजी को समर्पित करें और ऊँ भास्कराय ह्रीं मंत्र का जाप करने के पश्चात गुलाबी धागे से धारण करें. प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करते रहें. रोग,संतानहीनता जैसी अन्य कई समस्याओं का समाधान होगा.

चंद्र

यदि आप की कुंडली में चंद्र नीच का होकर वृश्चिक राशि में है,या राहु,केतु और शनि द्वारा प्रभावित है तो, रोहिणी नक्षत्र वाले दिन खिरनी की जड़, शुद्ध करके शिवजी को समर्पित करें और ऊँ श्रां श्रीं श्रौं स:चंद्रमसे नम: मंत्र का जाप कर के सफेद धागे में धारण करें. फेफड़े सम्बंधित रोग,एकाकीपन और भावनात्मक समस्याओं का समाधान होगा.

मंगल

आपकी कुंडली में मंगल नीच का होकर कर्क राशि में हो या आप मांगलिक हों तो मृगशिरा नक्षत्र वाले दिन अनंतमूल की जड़ शुद्धिकरण के पश्चात हनुमान जी की पूजा कर के ऊँ अं अंगारकाय नम: मंत्र का जाप कर के नारंगी धागे से धारण करें. क्रोध,अवसाद और वैवाहिक बाधा से मुक्ति मिलेगी

बुध

यदि आपकी कुंडली में बुध द्वादश,अष्टम भाव में या नीच का होकर मीन राशि में है, तो आप आश£ेषा नक्षत्र वाले दिन विधारा की जड़ गणेश भगवान को को समर्पित करने के पश्चात ऊँ बुं बुधाय नम: मंत्र का जाप कर के हरे रंग के धागे में धारण करें. इस से बुद्धि विकसित होगी तथ निर्णय लेने में हो रही त्रुटि का भी समाधान होगा.

गुरु

आपकी कुंडली में यदि गुरु रहु द्वरा युक्त है,राहु द्वारा ²ष्ट है या नीच का होकर मकर राशि में है,तो शुद्ध और ताजी हल्दी की गाँठ पीले धागे में, पुनवर्सु नक्षत्र वाले दिन कृष्ण भगवान या बृहस्पति देव जी की पूजा कर के ऊँ बृं बृहस्पतये नम: मंत्र का जप करके धारण करें. व्यवसाय,नौकरी,विवाह सम्बन्धी समस्या और लीवर सम्बन्धी रोगों में लाभ होगा.

शुक्र

यदि आपकी कुंडली में शुक्र अष्टम भाव में है या नीच का होकर कन्या राशि में है, तो आप सरपोंखा की जड़, भरणी नक्षत्र वाले दिन सफेद धागे से सायंकाल के समय लक्ष्मी जी का पूजन कर ऊँ शुं शुक्राय नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. संतानहीनता,कर्ज की अधिकता और धन के अभाव जैसी समस्या से मुक्ति मिलेगी.

शनि

आपकी कुंडली में यदि शनि सूर्य युक्त है,सप्तम भाव में है या नीच का होकर मेष राशि में है तो आप अनुराधा नक्षत्र वाले दिन बिच्छू या बिच्छौल की घांस को नीले धागे से काली जी की पूजा के पश्चात ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. कार्यों में हो रहे विलम्ब,कानूनी अड़चन और रोगों से मुक्ति मिलेगी.

राहु

आपकी कुंडली में राहु लग्न,सप्तम या भाग्य स्थान मे है, तथा शुभ ग्रहों से युक्त है तो आप आद्र्रा नक्षत्र वाले दिन चन्दन की लकड़ी का टुकड़ा शिव जी का अभिषेक कर के भूरे धागे में ऊँ रां राहुए नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. रोग,चिड़चिड़ापन,क्रोध,बुरी आदतों तथा अस्थिरता से मुक्ति मिलेगी.

केतु

यदि आपकी कुंडली में केतु,चन्द्र या मंगल युक्त होकर लग्नस्थ है, तो आप अश्विनी नक्षत्र वाले दिन गणेश जी का पूजन करने के पश्चात शुद्ध की हुई असगन्ध या अश्वगन्धा की जड़, ऊँ कें केतवे नम: मंत्र का जाप करने के पश्चात, नारंगी धागे से धारण करें. चर्म सम्बन्धी रोग,किडनी रोगों और वैवाहिक समस्याओं में लाभ होगा.
याद रखें कि समस्या की पूर्ण मुक्ति के लिये, आपको मंत्रों का जाप प्रतिदिन करना होगा.

ग्रह और उनसे सम्बन्धित दान समग्री

यदि आपको कोई ग्रह परेशान कर रहा है,तो सम्बन्धित जड़ को धारण करने के पश्चात उस से सम्बन्धित वस्तुओं का गरीब और असहाय लोगों को दान करने से भी लाभ होता है:

सूर्य : माणिक्य, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चंदन, गुड़, केसर अथवा तांबा.

चंद्र : बांस की टोकरी, चावल, श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प, घी से भरा पात्र, चांदी, मिश्री, दूध, दही.


मंगल : मूंगा, गेहूं, मसूर, लाल वस्त्र, कनेर पुष्प, गुड़, तांबा, लाल चंदन, केसर.


बुध : हरे मूंग, हरा वस्त्र, हरा फल, पन्ना, केसर, कस्तूरी, कपूर, घी, मिश्री, धार्मिक पुस्तकें.


गुरू : घी, शहद, हल्दी, पीत वस्त्र, शास्त्र पुस्तक, पुखराज, लवण, कन्याओं को भोजन.


शुक्र : सफेद वस्त्र, श्वेत स्फटिक, चावल, सुगंधित वस्तु, कपूर, अथवा पुष्प, घी- शक्कर- मिश्री-दही.


शनि : तिल, सभी तेल, लोहा धातु, छतरी, काली गाय, काला कपड़ा, नीलम, जूता,कंबल.


राहु : गेहूं, उड़द, काला घोड़ा, खडग़, कंबल, तिल, लौह, सप्त धान्य, अभ्रक.


केतु : तिल, कंबल, काला वस्त्र तथा पुष्प, सभी तेल, उड़द, काली मिर्च, सप्तधान्य.


प्राचीन आयुर्वेद सम्बंधी ग्रंथों में, रोगों के उपचार के लिये भी इन वनस्पतियों और जड़ों का बहुतायत में उपयोग मिलता है. ज्योतिष और आयुर्वेद का गहरा अंर्तसंबंध है और इसी के अनुरूप रोगों की चिकित्सा का भी प्रावधान राशि कालपुरुष बना कर किया गया है. !

Monday, January 26, 2015

मीन राशि की जीवनशैली

मीन राशि की जीवनशैली

मीन राशि की जीवनशैली

 

मीन राशि का खान-पान :

जल तत्व द्वारा शासित होती हैं |इन्हे ऐसा खाद्य पदार्थ अपने आहार में शामिल करने की जरुरत है कि जिससे इनके रक्त, यकृत और मस्तिष्क को फ़ायदा पंहुचे | इसके लिए अच्छा रहता हैं मांस, जिगर, प्याज, अनाज, सूखे हुए आलु बुखारे, नींबू, संतरा, सेब, अंगूर, पालक आदि | इन्हे पार्टियों में भोजन और पेय पदार्थ ज्यादा लेने की आदत हैं, जिस पर इन्हे अंकुश लगाना चाहिए और संयम करना सीखना चाहिए |ये सूजन की समस्या से भी पीड़ित हो सकते हैं,अत: सोडियम की मात्रा पर नजर रखने की जरुरत हैं | इन्हे नमक में कटौती करना चाहिए और अपने आहार में अन्य मसालों का प्रयोग करना चाहिए |

शारीरिक संरचना :

अधिकांश मीन राशि के लोग औसत कद काठी के होते हैं | इनकी बड़ी और पूर्ण आँखें होती हैं, और दूरी में होती हैं | यह राशि चक्र में इकलौती राशि है जो अलग-अलग तरह से दिख सकती हैं | आँखें बड़ी, आकर्षक और मुंदी हुई होती हैं | इनकी पूरी संरचना धुंधली, रहस्यमय, उदार और शांत दिखाई देती हैं | इनकी शारीरिक आचरण रहस्य के आवरण में होता हैं, जो बहुत मुश्किल है वर्गीकृत करने के लिए, लेकिन एक बात निश्चित हैं कि ये परोपकारी होते हैं |

आदतें :

ये बेतरतीब,असंगठित और अनुशासित नहीं होते हैं | और इस वजह से इनका दिमाग भी उलझा हुआ रहता हैं | ये शराब के लिए भी लत लगाए हुए होते हैं | जो इनके पारिवारिक जीवन को भी बाधित कर सकता हैं | इनके लिए सबसे अच्छा समाधान योग और ध्यान है, क्योंकि इससे मन की शांति मिलती हैं जो कि मीन राशि के जातक की मूल जरुरत होती हैं | इन्हे विरासत या आकस्मिक रुप से धन की प्राप्ति हो सकती हैं | लेकिन भुलक्कड़ होने की वजह से ये अपने नकद ग़लत जगह पर रख देते हैं | परिवार के मुद्दें और बकाया बिल इनके लिए तनाव का एक बड़ा स्रोत होते हैं|

स्वास्थ्य:

पूरे राशि चक्र में मीन राशि के जातक की शारीरिक संरचना सबसे निर्बल होती हैं | इनके पैर, श्वसन और रक्त परिसंचरण प्रणाली समस्याएं पैदा कर सकती हैं | इसके अलावा, ये बहुत भावुक लोग हैं, और आसानी से जंक फूड खाने लगते हैं और वजन बढ़ा लेते हैं | इन्हे शराब, धूम्रपान और मादक द्रव्यों से अत्यंत सावधान रहने की जरूरत है | प्रत्येक मौसमी बदलाव इनके सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता हैं |सबसे ज्यादा संभावित खतर पैरो को हो सकता हैं जैसे गठिया या रक्त संचार की समस्या | कभी कभी पीड़ा असली दुनिया के साथ संबंध की कमी के कारण हो सकती हैं |

सौन्दर्य:

मीन राशि के लिए सौंदर्य एक मानसिक सोच हैं बजाय कि भौतिकता के | ये चंचल हो सकते हैं | ये एक दिन बहुत अच्छे लग सकते हैं तो अगले ही दिन पूरी तरह से उबाऊ लग सकते हैं | इनके लिए मोती पहनना बहुत जरूरी हैं | जबकि मेकअप उज्ज्वल होना चाहिए, हल्के रंग के कपड़े इनके व्यक्तित्व को सुन्दर दिखा सकते हैं | ये फैशन की परवाह नहीं करते हैं | वे कपड़े है कि आराम कर रहे हैं, ये प्राकृतिक रेशों से बने हुए कपड़े पहनना पसंद करते हैं, सिंथेटिक बिल्कुल भी नहीं पसंद करते हैं | हालांकि, इनकी पसंद अच्छी होती हैं और बाहर ये परिष्कृत ढंग के कपड़े अच्छे रंग संयोजन के साथ पहन कर ही निकलते हैं |